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Sunday, August 9, 2020

भरतपुर - रास्ट्रीय मीणा महासभा ने मनाया विश्व आदिवासी दिवस,किया वृक्षारोपण



भरतपुर। विश्व आदिवासी दिवस की के अवसर पर रास्ट्रीय मीणा महासभा भरतपुर ईकाई द्वारा वृक्षारोपण कार्यक्रम का महाराजसर में आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता किशन सिंह मीणा ने की तथा मुख्य महासभा के जिलाध्यक्ष डॉ योगेन्द्र कुमार रहे।


 इस अवसर पर विषय प्रवर्तन करते हुए वरिष्ठ जिलाध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह मीणा ने कहा कि सयुंक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के हवाले से कहा कि आदिवासी जन समूह विश्व में अपनी सम्पदा, संसाधन और जमीन से वंचित व विस्थापित होकर विलुप्त होने की कगार पर है। एक तरफ गरीबी, बीमारी, बेरोजगारी और अशिक्षा के कारण आदिवासी समुदाय आज अपनी संस्कृति से दूर होता जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पर संस्कृतिकरण की समस्या के कारण उसे ऐसे दोराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है कि वे न तो अपनी संस्कृति बचा पा रहे हैं और न आधुनिकता से सामंजस्य बैठा पा रहे हैं व राष्ट्र की मुख्यधारा में शामिल हो पा रहे हैं।

 आजादी से पहले अंग्रेजो के हस्तक्षेप और आजादी के बाद कार्पोरेट व सरकारों की मिलीभगत के कारण आदिवासियों की मूल पहचान, मूल भाषा- बोली और सांस्कृतिक मूल्यों का पतन हो गया है। इसलिए आज इस बात की जरूरत है कि आदिवासी संस्कृति और उनके जीवन को बचाया जाय, अन्यथा संस्कृति और समाज की टूटन आदिवासियों को उग्र घटनाओं के लिए भी उकसा  सकती है। 


मुख्य वक्ता मुख्य महासचिव ने कहा कि आज देश में 8 करोड़ से ज्यादा ( लगभग 8.6 करोड़) आदिवासी आबादी निवास करती है। उन्हें कोर्पोरेट के विकास के लिए जल-जंगल और जमीन से वंचित किया जा रहा है। नेता, नौकरशाह एवं पूंजीपति के गठजोड़ के चलते आदिवासी शोषण अपनी चरम अवस्था में हैं। इसलिए लोकतंत्र पसंद हर व्यक्ति को आदिवासियों के संविधान प्रदत्त अधिकारों का समर्थन में आगे आना होगा। 
अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए किसन सिंह मीणा ने  कहा कि आदिवासी जीवन पद्धति में सहजता है और वह न प्रकृति के साथ दगा करता है, न अन्य मनुष्य समुदायों के साथ।  यह बात आज आधुनिक समाजों को सीखने की जरूरत है। उन्होंने आदिवासी नेता जयपाल सिंह ने मुंडा का स्मरण करते हुए आदिवासियों की स्वाधीनता आंदोलन में भूमिका को रेखांकित रेखांकित करते हुए यह अफ़सोस भी प्रकट किया कि आजादी का वास्तविक लाभ आदिवासी समुदाय को नहीं मिला है, बल्कि उनके मूल स्थानों को कॉर्पोरेट घरानों ने लूट लिया है।
जिला अध्यक्ष डॉ  योगेन्द्र मीणा ने कोरोना संकट के संदर्भ में आदिवासी जीवन के महत्व  को प्रकट करते हुए कहा कि यह तथ्य है कि कोरोना महामारी भी आदिवासी समुदाय को बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं  कर पाई है।  इसका इसका  कारण है कि आदिवासी जीवन प्रकृति  के ज्यादा करीब है। किंतु जो आदिवासी विकास की विभिन्न परियोजनाओं के कारण अपनी मूल वन-पर्वतीय धरा से विस्थापित हुआ है अथवा जो प्रवासी मजदूरों की हैसियत से बाहर गए हैं उनमें से अधिकांश लोग कोरोना की चपेट में आये हैं। क्योंकि उनकी जीवन शैली में तब्दीलियाँ हो गयीं और उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी आ गई है। आदिवासियों का खान-पान एवं जीवन शैली रोग प्रतिरोधक क्षमता स्वत: ही पैदा करती रही है। पारिस्थितिकीय संतुलन और पृथ्वी पर जीवन को बचने के लिए जंगल, पर्वत, नदी-नाले, वन्य जीवजंतुओं के संग मनुष्य के मन में सह-अस्तित्व की भावना जरुरी है। इसके लिए आदिवासी समाज से बहुत कुछ सीखा जा सकता है। 
इस अवसर पर  राजेन्द्र सिंह मीना  ने कहा  कि राष्ट्रीय आन्दोलन एवं सामाजिक परिवर्तन में आदिवासी नायकों के योगदान को पूरी तरह नजर अंदाज किया गया है। अत: शिक्षा पाठ्यक्रमों में आदिवासी इतिहास और संस्कृति को पढाया जाय। उनके अनुसार आरक्षण के अलावा आदिवासी कल्याण की योजनाओं को भी ठीक से लागू करने की भी जरूरत है।
कार्यक्रम का संचालन सांस्कृतिक सचिव अशोक महाराजसर ने किया। 
 इस अवसर पर बृजलाल नीमरोठ, भगवान सिंगकन्हैया लाल सरपंच  अशोक मीणा, वीरेन्द्र मालीपुरा,रूपवास ब्लॉक अध्यक्ष राम अवतार, धीरेन्द्र सिंह सादपुरा,एडवोकेट जीत सिंह, बृजेन्द्र रिछोली, नेमसिंह,  सतपाल मीना, छात्र महासभा अध्यक्ष रविन्द्र सिनपिनी,मेवाराम, नंदराम, आकाश, रणजीत, सुमित कुमार, इत्यादि ने भी  विचार प्रकट किये। इस अवसर अनेक  प्रबुद्ध  नागरिक उपस्थित हुये।साथ आज बयाना के संतोकपुरा में डॉ विशम्बर मीना, सहदेव, ने नेतृत्व में, कुम्हेर में भरत पिचूमर, तहसीलदार भगवान सिंह, के नेतृत्व में वृक्षारोपण किया है जिसमे कुम्हेर एस डी एम सुशीला मीना बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रही, कामां में गिरदावर मुकेश मीना, हरिओम मीना, निहाल मीणा आदि के नेतृत्व में,नगर के जालूकी में कैलाश मीना के नेतृत्व में, भुसावर के बौराज में जगदीश मीना, चन्द्र प्रकाश सलेमपुर के नेतृत्व में, नदवई में तिवेश महर,वैर के टूण्डपुर में बच्चूसिंह, राकेश उनापुर के नेतृत्व में, वृक्षारोपण कार्यक्रम किया जानकारी देते हुए मीडिया प्रभारी भूपेन्द्र सिंह मीणा ने सभी को आदिवासी दिवस की शुभकामनाएं प्रेषित की, साथ ही बताया कि प्रकृति प्रेमी आदिवासी समुदाय जन्माष्टमी के अवसर पर पुनः वृक्षारोपण का एक दौर शुरू कर ब्लॉकवार वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित करेगा।

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