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Thursday, August 27, 2020

भरतपुर - मेयर अभिजीत ने रुकवा दिए एकल हस्ताक्षर वाले बिलों के भुगतान, डीएलबी ने कहा- एक करोड़ रुपए तक के अधिकार आयुक्त के पास



भरतपुर। नगर निगम में भी पावर कोरोना हो गया है। मेयर अभिजीत कुमार और आयुक्त नीलिमा तक्षक में इस कदर ठन गई है कि शहर के विकास कार्य बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। सड़कों की मरम्मत, विद्युत शवदाह गृह की खराब मशीन को ठीक कराने और इकरन गौशाला में गोवंश के लिए चारा-भूसा का इंतजाम करने के लिए टेंडर तक नहीं हो पाए हैं। क्योंकि मेयर अभिजीत कुमार ने कोषाधिकारी (ट्रेजरी) कार्यालय समेत विभिन्न जगहों पर पत्र लिखकर बिलों के भुगतान रुकवा दिए थे। उनकी आपत्ति है कि चैक पर आयुक्त के साथ-साथ उनके भी हस्ताक्षर होने चाहिए, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।
वहीं आयुक्त नीलिमा तक्षक राज्य सरकार की गाइड लाइन का हवाला देते हुए कह रही हैं कि 1 करोड़ रुपए तक के काम कराने के अधिकार उनके पास हैं। खैर, अब तो स्वायत्त शासन निदेशालय ने भी पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट कर दी है कि 1 करोड़ रुपए तक की पावर आयुक्त के पास ही हैं। दरअसल, मेयर और आयुक्त के बीच विवाद की शुरूआत मार्च में कोरोना संक्रमण फैलने के साथ ही शुरू हो गई थी। क्योंकि निगम की पहली बैठक में पुरानी गाड़ी को कंडम घोषित किए बिना ही मेयर के लिए नई गाड़ी खरीद को लेकर प्रस्ताव लिया गया। बाद में यह मनमुटाव धीरे-धीरे बढ़ता गया और बात अधिकारों की लड़ाई तक पहुंच गई। इधर, विवाद के कारण सड़कों के टेंडर समय पर नहीं हो पाए।
वाहनों के मेंटीनेंस अटक गया। शहर में बहुत सी जगह कचरा वाहन नहीं पहुंच पा रहे हैं। क्योंकि शिकवे-शिकायत के बाद कोषाधिकारी ने करीब 40 लाख रुपए के बिलों के भुगतान रोक दिए थे। नगर निगम ठेकेदार संघ के अध्यक्ष दीपेंद्र शर्मा ने सीएम को पत्र लिखकर मेयर द्वारा कोष कार्यालय में ठेकेदारों के भुगतान रुकवाने का आरोप लगाया है। इधर, यह मामला जयपुर के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में भी पहुंच गया। इसके बाद अब मेयर और आयुक्त में समझौता कराए जाने के प्रयास शुरू हो गए हैं। माना जा रहा है कि संभवतः अगले 10-15 दिन में किसी मंत्री के हस्तक्षेप से मामला सुलझ सकता है।
इसके लिए चिकित्सा राज्यमंत्री डॉ. सुभाष गर्ग द्वारा समझौता कराए जाने की संभावना है। क्योंकि दोनों ही गर्ग के करीबी माने जाते हैं। हालांकि डॉ. गर्ग ने कहा है कि वे इस विवाद में नहीं पड़ना चाहते। लेकिन, मैं शहर के विकास को प्रभावी नहीं होने दूंगा। अगले 20 दिन बाद से विकास कार्यों में तेजी आएगी।
असरः खस्ताहाल सड़कों की मरम्मत, गौशाला में चारा और विद्युत शव दाह गृह मशीन के नहीं हुए टेंडर
  • आप भी जानिए... ये मामले हैं झगड़े की इनोवा गाड़ी... मेयर के लिए नई गाड़ी खरीदने की फाइल पर आपत्ति लगा दी गई। यहीं से मेयर/आयुक्त के बीच मनमुटाव की शुरुआत हुई।
  • मेयर का प्राइवेट आफिस.... आवास पर आफिस फर्नीचर, स्टेशनरी को एक लाख के बजाय 5 लाख रुपए के प्रस्ताव बने। फाइल पर आपत्ति से खरीद रुकी।
चहेतों को ठेके.... दोनों ओर से अपने लोगों को ठेके देने और दिलाने के आरोप लगे। कई ठेकेदारों का बार-बार टाइम बढ़ाया गया और उन्हें पार्ट पेमेंट भी कर दिए गए। बड़े टेंडरों के टुकड़े करने से भी विवाद बढ़ा।
भुगतान की पाॅवर... जुलाई से आयुक्त द्वारा ही एकल सिग्नेचर से बिल कोषालय भेजे गए। मेयर ने आपत्ति कर भुगतान रुकवाया।
चुनिंदा पार्षदों के काम... आरोप है कि उन्हीं चुनिंदा पार्षदों के वार्ड में काम हो रहे हैं जो सीधे आयुक्त से मिल रहे हैं।
मैंने सिंगल सिग्नेचर से बिल पास पर आपत्ति की थीः मेयर यह मेरा और मेरी सरकार के बीच का मामला है। नो कमेंट। लेकिन मैंने जो विषय उठाए हैं वह सही हैं। कोषाधिकारी द्वारा सिंगल सिग्नेचर से बिल पास करने पर आपत्ति की थी। टुकड़ों में टेंडर, कुछ ठेकेदारों के वर्क का बार-बार समय बढ़ाना और पार्ट पेमेंट करना जैसे विषय मैंने उठाए हैं। गाड़ी, पर्सनल आफिस फर्नीचर आदि खरीद प्रक्रिया नियमानुसार है। अभिजीत कुमार, मेयर
मेयर ऑफिस कम आए, छोटे बिल ट्रेजरी भेजे थेः आयुक्त कोरोना काल में मेयर के आफिस कम आने के कारण जुलाई से हमने छोटे बिलों को कोष कार्यालय भेजना प्रारंभ किया था। वैसे भी एक करोड़ तक के बिलों को आयुक्त के सिंगल सिग्नेचर से भेजा जा सकता है। कोषाधिकारी को डीएलबी ने इस संबंध में हाल ही में लेटर भी जारी कर दिया है। जरूरत के हिसाब से टेंडर लगा रहे हैं। नीलिमा तक्षक, आयुक्त

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