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Wednesday, March 11, 2020

सरकार ने दी मरीजों को बड़ी राहत डॉक्टर अब नहीं वसूल सकेंगे मनमानी फीस



भरतपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने निरोगी राजस्थान की पहल को जमीनी धरातल पर उतारने की पहल शुरू कर दी है।
अब डॉक्टरों की मनमानी फीस और मरीजों के साथ बुरे व्यवहार पर पैनी नजर रखी जाएगी। राजस्थान में घर पर मरीजों को देखने वाले सरकारी डॉक्टरों को अब देनी पड़ेगी परामर्श शुल्क की रसीद।
राज्य सरकार के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने निर्देश जारी कर मरीजों को बड़ी राहत दी है डॉक्टरों की मनमानी फीस पर पाबंदी लगा दी है निर्देशों के अनुसार परामर्श कक्ष में चस्पा करनी होगी लिए जाने वाले शुल्क के बारें में जानकारी।
चिकित्सा विभाग के अतिरिक्त निदेशक (अस्पताल प्रशासन) ने आदेश जारी कर सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को मरीजों को फीस की रसीद देने व शुल्क का प्रदर्शन करवाने के लिए पाबंद किया है। सरकारी डॉक्टर की ओर से निवास पर ली जाने वाली फीस राज्य सरकार द्वारा निर्धारित दरों से ही वसूलने के आदेश जारी किये हैं।
आदेश के अनुसार परामर्श शुल्क इस प्रकार हैं चिकित्सा अधिकारी/ग्रामीण चिकित्सा अधिकारी 75 रुपये। सीनियर मेडिकल ऑफिसर/जूनियर स्पेशलिस्ट/ सहायक प्रोफेसर/ ग्रामीण वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी 100 रुपए।
एसोसिएट प्रोफेसर/ सीनियर स्पेशलिस्ट 125 रुपए। प्रोफेसर 150 रुपए तथा सीनियर प्रोफेसर 200 रुपए फीस रखी गई है।

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