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Saturday, March 28, 2020

भरतपुर - आपदा से सहमे किसान कैसे चुकाएं ऋण




भरतपुर। किसानों को राहत के लिए सरकार ने फसली ऋण उपलब्ध कराने की सुविधा मुहैया कर रखी है। ऐसे में चुकता करने और पुन: लेने की प्रक्रिया सुचारू रहती है। लेकिन, अब 76 हजार से अधिक किसानों को खरीफ की फसल पर लिया गया ऋण चुकाना भारी हो जाएगा। क्योंकि, इन पर सैंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक का 200 करोड़ रुपए का फसली ऋण बकाया है जब तक खरीफ का चुकाता नहीं करेंगे तब तक रबी फसल पर ऋण नहीं मिल सकता। ऐसे में कुदरत की मार से सहमे किसान अब ऋण चुकता करने की व्यवस्था कैसे करेंगे।


सैंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के माध्यम से राज्य सरकार ने खरीफ 2019 की फसल पर अल्पकालीन ऋण की सुविधा मुहैया कराई। यह ग्राम सेवा सहकारी समितियों से जुड़े नए सदस्यों व अवधिपार की सीमा से बाहर पुराने किसानों को दिया गया। इसके तहत 263.24 करोड़ रुपए का ऋण वितरित किया। इसमें से 62.65 करोड़ रुपए का ऋण ही जमा करा पाए। शेष वर्ष 2019-20 का 200.59 करोड़ का ऋण अभी बकाया है। यह ऋण 76 हजार 319 किसानों पर बकाया है। हालांकि, सरकार इन्हें राहत देने के लिए ऋण जमा कराने की तारीख बढ़ा सकती है।
जिले में 265 ग्राम सेवा सहकारी समितियां हैं। इनमें किसान सदस्यों को फसली ऋण देने का प्रावधान है। यह सैंट्रल को-ऑपरेटिव बैंके के माध्यम से दिया जाता है। नियम है कि खरीफ की फसल में वितरित ऋण की रिकवरी होने पर उसे रबी की फसल पर दिया जाता है। इसके चलते किसानों पर खरीफ का दो सौ करोड़ से अधिक बकाया है। लेकिन, किसान भी क्या करे जब उसे ओलावृष्टि और बारिश ने बर्बाद कर दिया हो।

इस स्थिति में अन्नदाता के आंसू थम नहीं रहे। यह हाल ही में ओलावृष्टि और बारिश से किसानों की हजारों हैक्टेयर फसल की बर्बादी के कारण हुआ है। वहीं राज्य सरकार आश्वासनों तक सीमित रह गई है। ऐसे में बर्बाद हो चुके किसानों को कोई सहायता नजर नहीं आ रही। इसलिए किसान बिखरता जा रहा है। गौरतलब है कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुए मौसम परिवर्तन से गत 29 फरवरी को मौसम का कहर किसानों पर बरसा था। इसके बाद 4 व 5 मार्च की रात और 6 मार्च की शाम को बारिश के साथ ओलावृष्टि ने किसानों को झकझोर दिया दिया। फसल के भरोसे भविष्य की उम्मीदें टिकाए बैठे किसानों की मेहनत तब धराशायी हो गई। इस अवधि में किसानों की करीब 98 हजार हैक्टेयर फसल में नुकसान हुआ था।
सैंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के एमडी बिजेंद्र शर्मा का कहना है कि खरीफ की फसल में जो फसली ऋण वितरित किया था। उसका किसानों पर ऋण बकाया है और किसान ऋण चुकता कर रहे हैं वह ऋण रबी में दिया जा रहा है। वहीं ऋण के बकायादार किसानों के लिए ड्यू डेट बढ़ाई जा सकती है। जैसे निर्देश मिलेंगे वैसे पालना की जाएगी।

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