भरतपुर अपना घर आश्रम के माध्यम से 21 साल बाद पिता-पुत्र का हुआ मिलन - News Desktops

Breaking

Wednesday, February 26, 2020

भरतपुर अपना घर आश्रम के माध्यम से 21 साल बाद पिता-पुत्र का हुआ मिलन




भरतपुर। शहर का अपना घर आश्रम जहां असहाय लाचार लोगो व जीवो की निस्वार्थ भाव से सेवा तो की ही जाती है साथ ही बिछड़े लोगों को भी अपनों से मिलाने का काम अपना घर आश्रम कर रहा है।
आज भी अपना घर आश्रम में एक ऐसा ही मामला सामने आया है जहां उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिला के फाजिलनगर गांव के रहने वाले वैद्यनाथ गुप्ता को उनके परिजनों से मिलाया है।
बैजनाथ गुप्ता के अपने घरवालों से बिछड़ने की कहानी बहुत ही भावुक करने वाली है।
यूपी के फाजिलनगर के रहने वाले वैद्यनाथ गुप्ता 22 साल की उम्र में अपने घर वालों से उस समय बिछड़ गए थे जब उनकी बेटी मात्र डेढ़ साल और बेटा महज 3 वर्ष का था।
वर्ष 1999 में वेदनाथ गुप्ता रोजगार की तलाश में पंजाब चले गए थे और वहां एक मिठाई की दुकान पर काम करने के बाद अचानक गायब हो गए थे।
बैजनाथ गुप्ता के परिजनों ने उनको ढूंढने का हरसंभव प्रयास किया लेकिन कोई सफलता नहीं मिलने पर बैठा आकर बैठ गए।
आज 21 साल बाद जब बैजनाथ का जवान हो चुका बेटा अपने चाचा के साथ अपने पिता को लेने भरतपुर के अपना घर आश्रम पहुंचा तो उनका मिलन देखकर वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें आंसुओं से भर गई। अपना घर के संस्थापक अध्यक्ष डॉक्टर बीएम भारद्वाज में बताया कि उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले बैजनाथ गुप्ता 1999 से गायब हो गए थे।
और लगभग 6 माह गुप्ता अपना घर के कर्मचारियों को भरतपुर जिले की डीग तहसील के बहज गांव के समीप बीमार और घायल अवस्था में मिले थे।
डॉक्टर बीएम भारद्वाज ने बताया कि बैजनाथ गुप्ता को भरतपुर के अपना घर आश्रम में भर्ती कराया गया और स्वस्थ होने पर उन्होंने अपने घर का पता भी बताया।
उन्होंने बताया कि अपना घर की रेस्क्यू टीम ने जो पता बैजनाथ गुप्ता ने बताया उस पर संपर्क कर बैजनाथ गुप्ता के सकुशल होने की जानकारी उनके परिजनों को दी तो उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा।
आज बैजनाथ गुप्ता के भाई राकेश और बेटे अवधेश अपना घर आश्रम पहुंचे और पिता से मिलकर उन्हें अपने साथ घर ले गए हैं।
डॉक्टर बीएम भारद्वाज में बताया कि जिस डेढ़ साल की बेटी को बैजनाथ गुप्ता छोड़ आए थे उसकी आगामी 26 अप्रैल को शादी होनी है और एक पिता के लिए इससे बड़ी बात क्या होगी कि वह अब अपनी बेटी का कन्यादान कर पाएंगे। बैजनाथ गुप्ता का 3 वर्ष का वह बेटा भी अब जवान हो गया है और किसी कंपनी में अधिकारी भी बन गया है।
आज जब बेटा अपने पिता से मिला तो फफक-फफक कर रो पड़ा।
बैजनाथ गुप्ता के पुत्र अवधेश में बताया कि अपने पिता को ढूंढने के लिए कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ी थी लेकिन आज भरतपुर के अपना घर आश्रम ने उसके परिवार को खुशियों से से भर दिया है।
उल्लेखनीय की भरतपुर के अपना घर आश्रम द्वारा पूर्व में भी इसी प्रकार कई बिछड़े लोगों को अपनों से मिलाने का काम किया है।

No comments:

Post a Comment