भरतपुर - थानों में कबाड़ हो गए 65 करोड़ के जब्त वाहन, सबसे ज्यादा मथुरा गेट में, पुलिस नहीं कर पा रही डिस्पोजल - News Desktops

Breaking

Tuesday, September 10, 2019

भरतपुर - थानों में कबाड़ हो गए 65 करोड़ के जब्त वाहन, सबसे ज्यादा मथुरा गेट में, पुलिस नहीं कर पा रही डिस्पोजल




भरतपुर। पुलिस द्वारा जब्तशुदा वाहनों का निस्तारण नहीं होने से पुलिस थानों और मालखानों में वाहन और दूसरे सामान का अम्बार इकट्ठा हो गया है और ये कबाड़ में बदल रहे हैं। जिले के सभी 27 पुलिस थानों में 4050 जब्तशुदा वाहन ऐसे हैं जो दिन रोज कबाड़ बनते जा रहे हैं, इनकी अनुमानित कीमत करीब 65 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है। इन वाहनों में करीब 3000 दुपहिया एवं शेष चौपहिया वाहन बस, ट्रक, टैक्टर, कार, जीप तथा तिपहिया टैंपो शामिल हैं।
एक दर्जन पुलिस थाने ऐसे हैं जहां 80 से 100 जब्तशुदा वाहन हैं, वहीं शेष थानों में 125 से 200 वाहन जब्त शुदा हैं। शहर के मथुरा गेट थाना में सबसे ज्यादा 246 जब्त हैं। इसके अलावा जुआ सट्टे आदि मामलों में पकड़े गए उपकरण, नकदी, सहित अवैध शराब, लावारिस मिला सामान, हथियार, लाठी, तलवार, चाकू, मृतक लोगों के बिसरा जार भी शामिल हैं। पुलिस की ओर से जब्त किए जाने वाले वाले थाना परिसरों में लावारिस ही खड़े रहते हैं। इन वाहनों के रख-रखाव की कोई सुविधा नहीं होती। हर मौसम में खुले आसमान के नीचे वाहन के पड़े रहने से वे कुछ ही सालों में कबाड़ हो जाते हैं। वाहनों का कोई भी पार्ट्स सही सलामत नहीं बचता। इसलिए जब्ती के दौरान वाहन की जो कीमत होती है नीलामी के दौरान उसका 10 प्रतिशत भी पैसा मिलना मुश्किल हो जाता है।
नियमानुसार लावारिस जब्त वाहन के छह माह बाद निस्तारण की प्रक्रिया शुरू की जानी होती है। वाहन बरामद होने पर पुलिस पहले उसे धारा 102 के तहत पुलिस रिकॉर्ड में लेती है। बाद में न्यायालय में इसकी जानकारी दी जाती है। न्यायालय के निर्देश पर सार्वजनिक स्थानों पर पैम्फलेट आदि चस्पा कर उस वाहन से संबंधित जानकारी सार्वजनिक किए जाने का प्रावधान है ताकि वाहन मालिक अपना वाहन वापस ले सके। वहीं मालखाना निस्तारण में एसएचओ और मालखाना इंचार्ज की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। और ये दोनों ही जब्त माल के निस्तारण में खासी रुचि नहीं दिखाते। इधर ज्युडिशियरी का भी अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने से इनके निस्तारण में दिक्कतें आती हैं।

जब्त सामान के निस्तारण में देरी के ये हैं प्रमुख कारण

सूत्रों की मानें तो मालखाना में जब्त सामान के निस्तारण में देरी के एक नहीं कई कारण हैं। जिनमें सबसे पहला कारण है कि थानों में पुलिस की नफरी ही कम है। वहीं एसएचओ भी अन्य कामों में उलझे रहते हैं, जब्त सामान के निस्तारण में खासी रुचि नहीं दिखाते। वहीं मालखाना इस कदर भरे पड़े हैं, मालखाना इंचार्ज भी इस ओर ध्यान नहीं देते। खास बात यह है कि जब्तशुदा माल ज्युडिशियरी का होता है। थानों से जब्तशुदा माल को लेकर इस्तगासा कोर्ट में भेज दिया जाता है, लेकिन ज्युडिशियरी का अपेक्षित सहयोग नहीं मिलता। प्राय: अदालत किसी मामले में फैसला तो सुना देती हैं, लेकिन जब्त माल के निस्तारण के संबंध में कोई निर्देश नहीं देती। वहीं सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार दहेज का सामान या शराब, अफीम आदि जब्त नशीले पदार्थ का निस्तारण मुकदमे के निस्तारण से पूर्व भी किया जा सकता है, लेकिन फिर भी संबंधित थानाधिकारी और ज्युडिशियरी में तालमेल की कमी के चलते जब्त माल मालखाना में पड़े रहते हैं।

No comments:

Post a Comment