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Thursday, September 19, 2019

आदमखोर टाइगर टी-104 को वन विभाग ने किया ट्रेंकुलाइज



रणथम्भौर - कैलादेवी वन्यजीव अभ्यारण्य के सपोटरा क्षेत्र के जंगलों में 9 दिन से विचरण कर रहे आदमखोर टाइगर टी-104 को बुधवार की दोपहर को रणथंभोर वन्यजीव अभ्यारण्य की ट्रेंकुलाईज एक्सपर्ट टीम ने 7 दिन की मशक्कत के बाद गोरेहार व चैनपुरा के जंगलों में लोकेशन ट्रेक कर ट्रेंकुलाईज करने में सफलता मिली है। 
जिसकी चिकित्सकीय जांच के बाद एसटीआर पिंजरे में बंद कर बाघ को वेन से सवाई माधोपुर एनक्लोजर के लिए रवाना कर दिया गया। 
ग्राम पंचायत कालागुड़ा के सिमिर बाघ में 12 सितंबर को टाइगर द्वारा पिंटू माली का शिकार करने के बाद ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों के दबाब के वन विभाग द्वारा बाघ को आदमखोर घोषित कर दिया गया था,जयपुर,कोटा,सवाई माधोपुर,करौली व सपोटरा की अलग-अलग टीम सात दिन से रेड़ियो कॉलर व जीपीएस ट्रेकर के आधार पर ट्रेंकुलाईज करने का प्रयास कर रही थी। 
बुधवार को चैनपुरा के जंगलों से ट्रेंकुलाइज करने में सफलता मिली है। 
टाइगर टी-104 के चैनपुरा व किशोरपुरा के जंगलों में जाने पर रणथंभोर वन्यजीव अभ्यारण्य सवाई माधोपुर की ट्रेंकुलाईज टीम द्वारा सूरज धह के पास वुर्जा के जंगलों में 10-15 मीटर की दूरी से सांय 4:40 बजे गन से इंजेक्शन शूट किया गया। जिससे बाघ कुछ दूरी पर दवा का असर होते ही बेहोश होकर गिर गया। 
जिसे पकड़कर बाघ का चिकित्सकीय उपचार किया गया।जहां से उसे छिरवानी,चैनपुरा,निशाना,सपोटरा के रास्ते सवाई माधोपुर के बीड़ एनक्लोजर में जाया गया। 
आदमखोर टाइगर टी-104 को करौली जिले में बुधवार को दूसरी बार ट्रेंकुलाईज किया गया है। 
30 जुलाई को दुर्गेसी घटा करौली ईलाके में चरवाहे का शिकार करने पर 11 अगस्त को वन विभाग की टीम ने मासलपुर के ठेकरा गौशाला के पास बाघ को ट्रेंकुलाईज किया गया था।

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