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Tuesday, May 21, 2019

भरतपुर - बंदरो का आतंक टंकी में पानी देखने गए किशोर पर बंदरों का हमला, दो मंजिल से गिरा

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भरतपुर। बंदरों की बढ़ती संख्या और इन्हें पकड़ने में नगर निगम की लापरवाही अब शहरवासियों के लिए खतरनाक होती जा रही है। कोटा में नीट की तैयारी कर रहा 17 वर्षीय कौशल 15 मई की शाम को यहां स्वर्ण जयंती नगर स्थित अपने दो मंजिला मकान पर बनी टंकी में पानी देखने गया था। तभी वहां मौजूद बंदरों ने उस पर हमला कर दिया। इससे वह सड़क पर आ गिरा। इससे उसकी रीढ़ की हड्डी, हाथ और पैर में मल्टीपल फैक्चर हुए हैं। उसकी कमर से नीचे का हिस्सा सेंस लेस हो गया है। यानी वह अपंगता का शिकार हो गया है। कौशल सैन अब जयपुर के एक प्राइवेट अस्पताल में जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहा है। उसे अब तक 4 यूनिट ब्लड और एक यूनिट प्लेटलेट्स चढ़ाई जा चुकी है। 

डाक्टरों का कहना है कि कौशल की रीढ़ में चार जगह से डैमेज हुई हैं। इसी वजह से अब उसका कमर से नीचे का हिस्सा सेंसलेस हो गया है। दरअसल, उसके बाएं हाथ की हड्डी कोहनी से बाहर निकल गई है। दोनों पैरों के टकने, पंजे और घुटने से नीचे हड्डियों में 6 से ज्यादा फैक्चर हैं। ऐसे में उसे ठीक होने में वक्त लगेगा। इधर, हालात देखिए कि नगर निगम की रुचि उन कामों में रहती हैं, जिनमें कमीशन की व्यवस्था हो। संभवतः इसीलिए इस साल बंदर पकड़ने का कोई अभियान नहीं चलाया गया और ना ही उनकी संख्या नियंत्रण के लिए कोई प्लानिंग ही की। इधर, नगर निगम के आयुक्त मानसिंह मीणा ने बताया कि अधिकांश उत्पाती बंदरों को पकड़ कर गोवर्धन में छोड़ा चुका है। अब अगर कोई शिकायत आएगी तो दुबारा टेंडर करके बंदरों को पकड़ने की कार्यवाही की जाएगी। लेकिन, अब सवाल ये है कि यह कैसे साबित होगा किया कौन सा बंदर उत्पाती है और कौन सा शरीफ। 

घायल छात्र कौशल 

भरतपुर। बिहारीजी मंदिर परिक्रमा क्षेत्र में मौजूद बंदरों का झुंड। 

बंदर या कुत्ता काटे तो निगम पर करें मुआवजा पाने के लिए केस 

अगर कोई कुत्ता अथवा बंदर काटता है तो मुआवजे के लिए आप संबंधित निकाय के खिलाफ दावा किया जा सकता है। इसके अलावा भादंसं की धारा 289 के तहत आपराधिक कृत्य का मुकदमा भी किया जा सकता है। एडवोकेट अशोक सिंघल ने बताया कि इसमें दोषियों को 6 माह की सजा हो सकती है। 

बंदर और कुत्तों के काटने से रोज 125 लोग पहुंच रहे अस्पताल 

पिछले 10 महीने में करीब 35 हजार से ज्यादा लोगों को कुत्ते और बंदर अपना शिकार बना चुके हैं। यानी कि जिले में रोजाना करीब 125 लोग इस पीड़ा से गुजर रहे हैं। ये वे आंकड़े हैं जो आरबीएम अस्पताल के रिकॉर्ड में हैं। हालांकि अस्पताल प्रशासन के पास कुत्ते और बंदरों के काटे हुए रोगियों के आंकड़े अलग-अलग नहीं हैं। क्योंकि ऐसे रोगियों को एक ही इंजेक्शन लगता है, इसलिए अस्पताल प्रशासन रिकॉर्ड में ये आंकड़े डॉग बाइट्स के नाम से ही हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इनमें लगभग 30 फीसदी केस बंदरों के काटने के हैं। 

शहर में 20 हजार से ज्यादा हैं बंदर, रिकार्ड में पकड़े सिर्फ 691 

पशुपालन विभाग की ओर से हालांकि बंदरों की ताजा गणना नहीं की गई है। लेकिन, बंदर पकड़ने वाले ठेकेदार देवेंद्रसिंह ने बताया कि शहर में 20 हजार से ज्यादा बंदर हैं। इनमें से पिछले साल केवल 691 बंदरों को पकड़ा गया है। 

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