वैर-डॉ रांगेय राघव की जयंती मनाई - News Desktops

Breaking

Thursday, January 17, 2019

वैर-डॉ रांगेय राघव की जयंती मनाई


वैर। गुरूवार 17 जनवरी को हिन्दी साहित्य के डॉ रांगेय राघव की जयन्ती मनाई गई ।श्री आर आर कॉलेज में काव्य गोष्ठी व सांस्कृतिक रंगारंग कार्यक्रम आयोजित हुये ।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपखण्ड अधिकारी विशंभर दयाल शर्मा ने भाग लिया ।मुख्य अतिथि एसडीएम ने मां सरस्वती व डॉ रांगेय राघव के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर व माल्यार्पण कर शुरुआत की ।छात्र छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई ।वही राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में कवि सम्मेलन हुआ ।


आपको बता दे कि डॉ रांगेय राघव का जन्म 17 जनवरी 1923 को आगरा में हुआ । दक्षिणाय ताताचार्य के कुल में वैर निवासी तिरूमल्लै नम्बाकम रंगाचार्य की पत्नि कनकवल्ली ने तीसरे पुत्र रत्न को जन्म दिया। जिसका नाम पप्पू रखा। जबकि जन्मपत्री में नाम राममूर्ति था  और माता पिता ने वीर राघव नाम रखा । इस प्रकार पूरा नाम तिरूमल्ले नम्बाकम वीर राघव आचार्य  बना।
1949 में गोरखनाथ और उनका उनका युग विषय पर शौध कर डाक्टर की उपाधि ली। बचपन से ही पप्पू को कविता व चित्रकला का शौक था। 15 बर्ष की आयु में एक लम्बी कविता मेनका लिख डाली । कॉलेज पृष्ठभूमि पर पहला मौलिक उपन्यास घरौंदे ने वीर राघव को साहित्यकार के रूप में मान्यता दिला दी। मित्र की सलाह पर नाम छोटा कर रंगाचार्य के पुत्र रांगेय व साथ में अपना नाम राघव जोडकर  रांगेय राघव बने। डॉ  रांगेय राघव का सपना वैर में तपोभूमि विश्वविद्यालय स्थापित करने का था। राघव ने वैर के नौ लक्खा बाग में शांति निकेतन जैसा विश्वविद्यालय  बनाये जाने का सपना देखा।जिसका उन्होने नाम तपोभूमि रखा। उनका यह सपना अधूरा रहा । आज कस्बे में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय प्रांगण में लगी एक प्रतिमा के अतिरिक्त कुछ भी नहीं है।कस्बा  के मध्य में स्थित सीताराम जी का मंदिर उनका निवास स्थान था और वैर में स्थित प्रताप फुलवाडी,सफेद महल,नौ लखा बाग और दोला वाला बाग उनकी कर्मस्थली।  जिनका वर्णन उनकी कहानियां और उपन्यासों में भी है ।  उनकी पत्नि सुलोचना राघव भी  एक एसोसिएट प्रोफेशर थी। राघव के प्रसिद्ध उपन्यास कब तक पुकारूँ पर धारावाहिक भी बनाया गया था ।

No comments:

Post a Comment